प्रेम और दया - Love and Compassion

प्रेम और दया - Love and Compassion

प्रेम और दया का भावना से न केवल आप दूसरों का भला कर सकते है बल्कि इससे स्वयं व्यक्ति का भी कल्याण और मंगल होता है। ये भाव जहाँ पाने वालों को प्रफुल्लित करते है वहाँ बाँटने वाले की चेतना और हृदय का भी परिष्कार करते है। प्रेम और दया ऐसे जीवन मूल्य है जिनके बिना संसार में परिवर्तन सम्भव नहीं। ये उस चन्दन के समान है जो केवल उस माथे को ही शीतल नहीं करते जहाँ लगाया जाता है अपितु लगाने वाले की अंगुलियों को भी सुगन्धित कर देते है। विश्‍वबन्धुत्व का वैदिक उद्घोष का आधार भी यही है कि सभी प्राणी मिल कर चले, मिलकर प्रेम से बोले, मिल कर रहे। प्रेमवत व्यवहार से मनुष्य शत्रु को भी मित्र बना लेता है, कठोर हृदय वाले को भी कोमल हृदय वाला बना देता है और हिंसक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति को भी परिवर्तित कर समाज का एक आत्मनिर्भर एवं उपयोगी इंसान बनाया जा सकता है। प्रेम रहित जीवन तो निरा पशु तुल्य है। प्रेम से प्रेम की उपज और घृणा से घृणा की उपज उगती है। अतः मानव को प्रत्येक परिस्थिति में प्यार व सहानुभूति रखते हुए ही जीवनयापन करना चाहिए। प्राचीन व आधुनिक कवियों ने इन भावों से भरी हुए रचनाएँ जगत को दी है।

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