Posts

मिट्टी से पहचान तक - मैं नितिन लकड़े, प्रजापत नगर इंदौर से

Image
नमस्कार, मैं नितिन लकड़े। प्रजापत नगर इंदौर का रहने वाला हूँ। आप सोच रहे होंगे मैं ब्लॉग क्यों लिख रहा हूँ? हम प्रजापत हैं, मिट्टी को आकार देना हमारा काम है। मेरे दादा कहते थे - बेटा, मिट्टी कभी खराब नहीं होती, बस उसे सही हाथ चाहिए। यही बात मैं सिरपुर तालाब पर देखता हूँ। लोग उसे गंदा कहते हैं, पर मैं उसमें आने वाले कल का सुंदर इंदौर देखता हूँ। इसीलिए मैंने ये ब्लॉग शुरू किया है।  यहाँ मैं लिखूंगा: प्रजापत नगर की हर छोटी-बड़ी खबर सिरपुर तालाब को बचाने की हमारी कोशिश और रोज एक अच्छी बात जो आपके दिन को अच्छा बना देये सिर्फ मेरा ब्लॉग नहीं है, ये हम सब प्रजापत नगर वालों का ब्लॉग है। अगर आप प्रजापत नगर या सिरपुर तालाब के पास रहते हैं, तो कमेंट में जरूर बताइए। आपका अपना नितिन लकड़े - Nitin Lakade प्रजापत नगर, इंदौर

समग्र आईडी में नाम की गलती कैसे सुधारें

Image
  नमस्कार, मैं नितिन लकड़े, प्रजापत नगर, इंदौर से। पिछले लेख में मैंने बताया था कि नाम गलत होने से जाति प्रमाण पत्र में परेशानी आती है। आज मैं बताऊँगा कि समग्र आईडी में सुधार कैसे होता है। समग्र आईडी में सुधार क्यों जरूरी है ? मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना, छात्रवृत्ति और जाति प्रमाण पत्र - सबका आधार समग्र आईडी है। अगर समग्र में नाम गलत है तो कोई भी योजना का लाभ नहीं मिलता। सुधार के लिए क्या करें ? १. समग्र पोर्टल पर जाएं samagra.gov.in पर जाकर समग्र आईडी खोजें। २. आधार से जोड़ें समग्र को आधार से जोड़ने का अनुरोध करें। नाम आधार के अनुसार ही सही होगा। ३. नगर निगम में आवेदन दें अगर ऑनलाइन न हो तो जोनल कार्यालय इंदौर में जाकर सुधार फॉर्म भरें। साथ में आधार कार्ड और अंकसूची लगाएं। ४. समय आमतौर पर सात दिन में समग्र आईडी सुधर जाती है। मेरा सुझाव है कि पहले समग्र, फिर आधार, फिर जाति प्रमाण पत्र - इसी क्रम में सुधार करवाएं। यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे साझा करें। नितिन लकड़े - Nitin Lakade प्रजापत नगर, इंदौर

नितिन लकड़े प्रजापत नगर इंदौर - जाति प्रमाण पत्र सुधार की जानकारी

Image
नितिन लकड़े - प्रजापत नगर, इंदौर से नमस्कार, मेरा नाम नितिन लकड़े है और मैं इंदौर के प्रजापत नगर का रहने वाला हूँ। यह ब्लॉग मैंने अपने अनुभव साझा करने के लिए बनाया है।  नाम की गलती से होने वाली परेशानी सरकारी कागजों में नाम की छोटी सी गलती बहुत बड़ी परेशानी बन जाती है। मेरे नाम में लकड़े शब्द को कई जगह लकाड़े लिख दिया गया था। इसी कारण मेरे बच्चों गीतिका और कर्मण्य के जाति प्रमाण पत्र बनने में देरी हुई। मध्यप्रदेश में जाति प्रमाण पत्र कैसे सुधरवाएं ? अगर आपके प्रमाण पत्र में भी नाम गलत है तो आप यह काम कर सकते हैं। पहला चरण - शपथ पत्र बनवाएं आपको तहसील के पास से एक शपथ पत्र बनवाना होगा कि आपका सही नाम नितिन लकड़े है। दूसरा चरण - आवेदन करें एमपी ऑनलाइन या लोक सेवा केंद्र पर जाकर आरएस / ४३९ के तहत सुधार के लिए आवेदन दें। तीसरा चरण - दस्तावेज लगाएं आवेदन के साथ आधार कार्ड, समग्र आईडी और स्कूल की अंकसूची लगाएं। चौथा चरण - जाँच पटवारी द्वारा जाँच के बाद तहसीलदार द्वारा नया प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। समग्र आईडी सुधारना क्यों जरूरी है ? मध्यप्रदेश में सभी योजनाओं का आधार समग्र आईडी ह...

समय रहते अपनों की कीमत समझिए | एक भावुक और प्रेरणादायक हिंदी कहानी | Nitin Lakade

Image
  समय रहते जाग जाओ, वरना पछताने के लिए भी समय नहीं बचेगा! कहानी: बूढ़े पिता की आखिरी इच्छा रवि एक बड़े शहर में नौकरी करता था। अच्छी तनख्वाह, बड़ा घर, कार और आधुनिक सुविधाएँ—उसके पास सब कुछ था। लेकिन एक चीज़ थी, जिसके लिए उसके पास हमेशा कमी रहती थी— समय । उसके गाँव में उसके बूढ़े पिता अकेले रहते थे। माँ को गुज़रे हुए पाँच साल हो चुके थे। पिता अक्सर रवि को फोन करते और कहते— “बेटा, जब समय मिले तो गाँव आ जाना। तुझसे बहुत दिनों से मिला नहीं हूँ।” रवि हर बार एक ही जवाब देता— “पिताजी, अभी बहुत काम है। अगले महीने पक्का आऊँगा।” लेकिन वह अगला महीना कभी नहीं आया। दिन बीतते गए। एक दिन रवि के फोन पर गाँव के पड़ोसी का फोन आया। रवि ने फोन उठाया। उधर से आवाज आई— “बेटा… जल्दी गाँव आ जाओ। तुम्हारे पिताजी की तबीयत बहुत खराब है।” रवि घबरा गया। उसने तुरंत कहा— “मैं आज ही निकलता हूँ।” लेकिन उसी समय उसके ऑफिस में एक बहुत जरूरी मीटिंग थी। उसने सोचा— “पहले यह काम पूरा कर लेता हूँ। शाम तक निकल जाऊँगा।” शाम हुई, फिर एक और काम आ गया। उसने गाँव जाने का कार्यक्रम अगले दिन पर टाल दिया। अगली सुबह फिर फोन आया। इस ...

₹10 वाली कलम ने कैसे दिलाया ₹10 लाख का पैकेज : एक सच्ची प्रेरणादायक कहानी

Image
"₹10 वाला कलम और ₹10 लाख का सौदा" पुणे में अंकित नाम का लड़का था। 12वीं फेल। घर की हालत खराब। एक दिन उसने स्टेशन पर ₹10 वाली कलम बेचना शुरू किया। लोग हंसते थे "ये क्या करेगा?"  अंकित हर ग्राहक से 2 मिनट बात करता। नाम पूछता, हालचाल लेता। और कलम के साथ एक छोटी चिट दे देता - "आपका दिन अच्छा जाए"।3 महीने में लोग उसी से कलम लेने आने लगे। "अंकित भैया की कलम में दुआ होती है"।1 साल बाद एक कंपनी के CEO उसी स्टेशन से गुजरे। अंकित ने उन्हें भी कलम + चिट दी। CEO को बात पसंद आई। उन्होंने अंकित को अपनी कंपनी में "Customer Experience Head" की नौकरी ऑफर की। सैलरी ₹10 लाख सालाना।आज अंकित 200 लोगों की टीम चलाता है। ग्यान: प्रोडक्ट नहीं, रिश्ता बेचो। लोग चीज नहीं, इज्जत खरीदते हैं।छोटी शुरुआत, बड़ी सोच। ₹10 से भी इम्पायर शुरू हो सकती है।हर इंसान से अच्छा व्यवहार करो। पता नहीं कौन आपका दरवाजा खोले। Q1: ये कहानी असली है या काल्पनिक? A: ये कहानी प्रेरणा के लिए लिखी गई है। इसका मकसद आपको मोटिवेट करना है। Q2: ₹10 से बिजनेस कैसे शुरू करें? A: किसी भी छोटे प्रोड...

दादी की एक थाली: भारतीय संस्कृति का असली मतलब | Hearttouching Story

Image
छोटा था तब मुझे लगता था कि खाना सिर्फ भूख मिटाने के लिए होता है। रोटी, सब्जी, दाल... खाओ और खेलने भाग जाओ। लेकिन दादी की एक थाली ने मेरी सोच ही बदल दी।दादी गांव से थीं। उनके पास न फ्रिज था, न माइक्रोवेव। लेकिन उनके पास समय था। और उस समय से वो संस्कार परोसती थीं।वो थाली कोई आम थाली नहीं थी। स्टील की गोल थाली। बीच में चावल का पहाड़, चारों तरफ कटोरियाँ। एक में दाल, एक में सब्जी, एक में अचार, एक में दही। और सबसे ऊपर केले का पत्ता।मैं पूछता: "दादी, इतनी सारी कटोरी क्यों?" दादी हंसकर बोलतीं: "बेटा, ये षड्रस है। भारतीय संस्कृति कहती है कि भोजन में 6 रस होने चाहिए - मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा, कषाय। तभी शरीर और मन दोनों तृप्त होते हैं।"पहला सबक: संतुलन दादी कभी एक ही सब्जी नहीं बनाती थीं। कहतीं "जैसे जीवन में सुख-दुख दोनों चाहिए, वैसे थाली में भी सब रस चाहिए। सिर्फ मीठा खाओगे तो बीमार पड़ जाओगे।" उस दिन समझ आया कि संस्कृति का मतलब Balance है।दूसरा सबक: सम्मान खाने से पहले दादी थाली के चारों तरफ पानी का गोल घेरा बनातीं। फिर अन्न देवता को प्रणाम। कहतीं "अन...

बुद्धिमान लकड़हारा और लालची सेठ की कहानी | Rochak Naitik Kahani

Image
बुद्धिमान लकड़हारा और लालची सेठ की कहानी      बुद्धिमान लकड़हारा और लालची सेठ की कहानीबहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल के किनारे रामू नाम का एक लकड़हारा रहता था। रामू बहुत गरीब था, लेकिन दिल का बहुत साफ और ईमानदार था। वह रोज जंगल से लकड़ी काटकर लाता और बाजार में बेचकर अपना गुजारा करता था।      लालची सेठ की चालउसी गांव में एक बहुत लालची सेठ रहता था जिसका नाम था धनपत। सेठ को हमेशा दूसरों की चीज हड़पने की आदत थी।एक दिन सेठ ने देखा कि रामू एक बहुत मोटा और कीमती सागौन का पेड़ काट रहा है। सेठ के मन में लालच आ गया।  वह तुरंत रामू के पास गया और बोला:  "अरे रामू! ये पेड़ मेरा है। मैं तुम्हें 10 रुपये दूंगा। लकड़ी मुझे दे दो।"रामू ने कहा: "सेठ जी, ये पेड़ सरकारी जंगल का है। ये किसी का नहीं है। मैं इसे काटकर मंडी में 50 रुपये में बेचूंगा।"सेठ गुस्से में बोला: "अगर नहीं दी तो देख लेना। मैं राजा से शिकायत कर दूंगा।"      लकड़हारे की बुद्धिमानीरामू डर गया। रात भर उसे नींद नहीं आई। अगले दिन सुबह उसने एक तरकीब सोची।वह उस पेड़ की लकड़ी के 4 बराब...